Sunday, January 25, 2026
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बजट सत्र में जी राम जी पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

-राजेश माहेश्वरी, स्वतंत्र पत्रकार

संसद के आगामी बजट सत्र में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल पर भारी हंगामा होने की संभावना है। यह मुद्दा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा जोर-शोर से उठाया जा रहा है। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाया गया है और शीतकालीन सत्र में ही संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस नए बिल को मनरेगा को “खत्म करने की साजिश” बता रहे हैं। उनका आरोप है कि नए कानून में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जिनसे गरीबों के रोजगार की गारंटी प्रभावित होगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता राहुल गांधी ने घोषणा की है कि वे इस मुद्दे को बजट सत्र के दौरान संसद में उठाएंगे।
संसद का बजट सत्र आगामी 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित होगा। बजट सत्र की शुरुआत लोकसभा में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगी।
विपक्ष के अनुसार, मनरेगा में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित था, जबकि नए कानून में 125 दिन के रोजगार का प्रावधान है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर आशंकाएं हैं। साथ ही, खर्च का प्रतिशत भी राज्यों को अधिक उठाना पड़ेगा। विपक्षी दलों की बयानबाजी से इस बात के प्रमाण मिल रहे हैं कि आगामी बजट सत्र में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का एक प्रमुख मुद्दा होगा, जिससे सदन में हंगामेदार स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
बीती 22 जनवरी को दिल्ली में ‘मनरेगा बचाओ मोर्चा’ के राष्ट्रीय सम्मेलन में राहुल गांधी ने कानून का नाम सुनकर व्यंग्य किया और कहा कि उन्हें इसका नाम भी नहीं पता। उन्होंने इसे गरीबों के अधिकार छीनने की साजिश बताया और मोदी सरकार को खुली चेतावनी दी कि अगर गरीब एकजुट हो जाएंगे तो सरकार पीछे हट जाएगी। इस दौरान मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी माथे पर गमछा बांधे और हाथों में फावड़ा लिए मजदूर की वेशभूषा में नजर आए।
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा, ये नया कानून क्या है, मुझे पता ही नहीं। क्या नाम है? जब जनता ने ‘जी राम जी’ कहा, तो राहुल बोले, क्या? जी ग्राम जी? पता नहीं क्या! इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा, हमको भी नहीं पता क्या नाम है। मनरेगा पर हम इस सत्र में संसद में लड़ेंगे। राहुल ने मनरेगा को गरीबों के लिए अधिकार-आधारित योजना बताया, जिसमें काम की गारंटी थी और पंचायती राज के माध्यम से चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी इसे खत्म करना चाहते हैं और केंद्र को काम व फंड का पूरा नियंत्रण देना चाहते हैं, जिसमें भाजपा शासित राज्यों को प्राथमिकता मिलेगी।
वही बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस की तरफ से इस बिल का विरोध करने को लेकर फटकार लगाई है। बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी की अलोचनाओं ने कांग्रेस की हिंदू विरोधी मानसिकता को उजागर किया है। साथ ही कहा कि कांग्रेस गलत जानकारी फैला रही है। सरकार का पक्ष है कि इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन के रोजगार की गारंटी देना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप तैयार करना है। खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार मनरेगा को खत्म करने का काम इसलिए कर रही है, ताकि देश के दबे-कुचले लोगों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी लोगों को बंधुआ मजदूर बनाकर अमीरों के हाथ में सौंपने जा रहे हैं। ताकि लोग अमीरों के इशारों पर, उनकी मर्जी के पैसों पर काम करें।
नये कानून के तहत गांवों में सड़क निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास और आजीविका से संबंधित संसाधनों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे रोजगार सृजन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और विकास को बढ़ावा मिलेगा। विधेयक में मजदूरी भुगतान को साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिनों के भीतर अनिवार्य किया गया है। भुगतान में देरी होने पर श्रमिकों को मुआवजा देने का भी प्रावधान है। कृषि मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्यों को 60 दिनों की विराम अवधि का विकल्प दिया गया है। ताकि श्रमिक बुवाई और कटाई के दौरान कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध रह सकें।
बीते वर्ष संसद के शीतकालीन सत्र में ये कानून लाया गया था। संसद में कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे 20 वर्ष पुराने मनरेगा कानून का आधुनिक विकल्प बताते हुए ग्रामीण विकास के लिए संरचनात्मक सुधार करार दिया था। जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे महात्मा गांधी का नाम हटाने, राज्यों पर बोझ बढ़ाने और रोजगार गारंटी को कमजोर करने की कोशिश बताते हुए तीखा विरोध किया था।
इससे पहले 22 जनवरी की सुबह जी राम जी बिल को लेकर कर्नाटक विधानसभा में हंगामा देखने को मिला। जहां राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य सरकार की तरफ से तैयार भाषण पढ़ने से इंकार कर दिया। इसमें जी राम जी बिल को लेकर आलोचना शामिल था। वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा है कि उनकी सरकार भी ऐसा प्रस्ताव लाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनरेगा के स्थान पर लागू होने वाला वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 अभी तक औपचारिक रूप से अधिसूचित और लागू नहीं हुआ है, इसलिए केंद्र सरकार आगामी बजट में इस योजना को निर्बाध समर्थन सुनिश्चित करने के लिए दोहरी बजटीय आवंटन पर विचार कर रही है। नए कानून के तहत नियम अभी तैयार किए जा रहे हैं, इसलिए सरकार संक्रमणकालीन चरण में मनरेगा और वीबी-जी राम जी योजना दोनों के लिए एक साथ निधि उपलब्ध करा सकती है। नियमों के अधिसूचित होने के बाद ही नया कानून लागू होगा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार अगले छह महीनों में मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने और नए कानून को लागू करने की योजना बना रही है। वीबी-जी आरएएमजी विधेयक अभी लागू नहीं हुआ है, इसलिए केंद्र सरकार ग्रामीण परिवारों के लिए मजदूरी पर आधारित रोजगार में किसी भी प्रकार की बाधा से बचना चाहती है।
बजट में भारी बढ़ोतरी का संकेत देते हुए, सरकार ने पहले घोषणा की थी कि वीबी-जी आरएएम जी के लिए 1,51,282 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अपने बजट घोषणा में इस आवंटन को और बढ़ा सकती है। एमजीएनआरईजीए के लिए वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 दोनों में 86,000 करोड़ रुपये का अपरिवर्तित आवंटन किया गया था। नए अधिनियम के तहत, अनुमानित केंद्रीय निधि का हिस्सा 95,692.31 करोड़ रुपये है, शेष राशि राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। नए अधिनियम में केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का लागत-साझाकरण अनुपात अनिवार्य किया गया है। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राज्यों को निधि आवंटन के प्रस्तावित मानदंडों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
जी राम जी बिल पास होने के वक्त विपक्ष ने संसद के शीतकालीन सत्र में खूब हंगामा किया था। विपक्ष ने संसद से बाहर भी इसका विरोध किया था। विपक्षी नेताओं की ताजा बयानबाजी से साफ है बजट सत्र में जी राम जी की गूंज जोर शोर से सुनाई देगी।

(राज्य मुख्यालय पर स्वतंत्र पत्रकार)

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