Wednesday, March 11, 2026
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आई-पैक से जुड़े छापे के मामले में ईडी के दावे को कलकत्ता हाई कोर्ट ने माना सही, टीएमसी की याचिका खारिज

कोलकाता। इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) से जुड़े छापे के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दावे को स्वीकार कर लिया और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सुव्रत घोष की एकल पीठ ने बुधवार को कहा कि 8 जनवरी को साल्ट लेक स्थित आई-पैक कार्यालय और मध्य कोलकाता में सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई तलाशी के दौरान कोई भी दस्तावेज या सामग्री जब्त नहीं की गई। इसके साथ ही अदालत ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से दायर उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि तलाशी के दौरान ईडी ने पार्टी के गोपनीय दस्तावेज एकत्र किए। टीएमसी का दावा था कि वर्ष 2020 से आई-पैक पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़ा हुआ है और छापे के दौरान गोपनीय दस्तावेजों को निशाना बनाया गया।

सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने अदालत को बताया कि धन शोधन जांच के सिलसिले में की गई तलाशी में दोनों स्थानों से कोई भी दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि जिन दस्तावेजों को अधिकारी एकत्र करने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने साथ ले गई थीं।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से अनुरोध किया कि उनके इन बयानों को रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। इसके बाद न्यायमूर्ति सुव्रत घोष ने ईडी के पक्ष को स्वीकार करते हुए टीएमसी की याचिका का निपटारा कर दिया।

गोपनीय दस्तावेज जब्त किए जाने के आरोपों पर ईडी की ओर से यह भी कहा गया कि यदि तृणमूल कांग्रेस को आपत्ति है, तो उसे मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए, क्योंकि दस्तावेज वही ले गई थीं। ईडी ने यह तर्क भी दिया कि टीएमसी की ओर से हलफनामा दाखिल करने वाला व्यक्ति 8 जनवरी की तलाशी के दौरान मौके पर मौजूद नहीं था, इसलिए उसे घटनाक्रम की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं हो सकती। अदालत ने इन सभी दलीलों को स्वीकार करते हुए मामले को खारिज कर दिया। हालांकि, संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों के काम में बाधा डालने के आरोप से जुड़ी ईडी की मुख्य याचिका पर सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि इस मुद्दे से संबंधित एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, जिसके कारण स्थगन की मांग की गई।

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