Tuesday, February 17, 2026
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आरजी कर बलात्कार-हत्या कांड : ‘बड़ी साजिश’ की जांच की मांग को लेकर पीड़िता के माता-पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

कोलकाता। अगस्त 2024 में राज्य संचालित आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी के दौरान दुष्कर्म और हत्या की शिकार हुई महिला चिकित्सक के माता-पिता ने मंगलवार को यहां की अदालत में याचिका दायर कर मामले में “बड़ी साजिश” के नजरिये से जांच की मांग की। पीड़िता के परिजनों ने अदालत से अनुरोध किया है कि घटना की रात ड्यूटी पर मौजूद सभी लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए। उन्होंने प्रारंभिक जांच से जुड़े एक कोलकाता पुलिस अधिकारी से भी कस्टोडियल पूछताछ की मांग की है। परिजनों ने केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पर असंतोष जताते हुए कहा कि एजेंसी ने नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को एकमात्र आरोपित बताया है, जबकि “बड़ी साजिश” के पहलू को नजरअंदाज किया गया। पीड़िता के पिता ने संवाददाताओं से कहा, “हमारा मानना है कि हमारी बेटी के साथ हुई इस जघन्य घटना में सिर्फ संजय रॉय शामिल नहीं हो सकता। उस रात कुछ और लोग भी थे। हमने सियालदह अदालत से प्रार्थना की है कि सभी संदिग्धों, जिनमें एक कोलकाता पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं, को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा कराए गए पॉलीग्राफ परीक्षण को अंतिम और अचूक साक्ष्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि देश की विभिन्न अदालतों के पूर्व आदेशों में ऐसे परीक्षणों की सीमाएं स्पष्ट की गई हैं। उन्होंने कहा कि हमने अदालत से हमारी याचिका और बड़ी साजिश के सिद्धांत पर विचार करने का अनुरोध किया है। अदालत ने हमारी याचिका स्वीकार कर ली है। इस दर्दनाक घटना ने देशभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। बड़ी संख्या में लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, सड़कों पर उतरे थे और कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन जारी रहे। पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने भी कोलकाता में अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल की थी।

गौरतलब है कि निलंबित नागरिक पुलिसकर्मी संजय रॉय को दोषी ठहराए जाने के बाद आजीवन कारावास (मृत्यु तक) की सजा सुनाई जा चुकी है। परिजनों ने कहा है कि जब तक इस जघन्य अपराध में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उन्हें सजा नहीं दिलाई जाती, तब तक उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। मामले में आगे की सुनवाई का इंतजार है।

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