Sunday, February 15, 2026
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एआई के भविष्य पर भारत में चर्चा

भारत जी-20 शिखर सम्मलेन की ऐतिहासिक सफलता के बाद एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन करने जा रहा है, जिसमें 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष नेताओं के साथ ही 45 से अधिक देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्व भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित यह शिखर सक्वमेलन उस दौर में हो रहा है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्व राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज की दिशा तय करने वाली प्रमुख शक्ति बन चुकी है। साथ ही विश्व विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है। विश्व व्यवस्था खंडित हो रही है। अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्संतुलन और रणनीतिक गठबंधनों की नई परिभाषाएं ये सब एआई को भू-राजनीति के केंद्र में ला चुके हैं। इसलिए इस वैश्विक सक्वमेलन का महत्व को आसानी से समझा जा सकता है। इस समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा सहित अनेक राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक एआई विमर्श का परिधीय खिलाड़ी नहीं, बल्कि केंद्रीय मंच का दावेदार बन रहा है। ग्लोबल इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का स्वरूप इसकी व्यापकता को दर्शाता है। 100 से अधिक देशों की भागीदारी, हजारों पंजीकरण, सैकड़ों सत्र और स्टार्टअप्स की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि भारत वैश्विक एआई विमर्श का केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। इसलिए अगर देखा जाए तो भारत के लिए यह सक्वमेलन ऐतिहासिक है। एआई क्रांति में जो देश जितना आगे होगा, उसे उतना ही रणनीतिक लाभ प्राप्त होगा। रक्षा, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और कूटनीति सभी क्षेत्रों में एआई निर्णायक भूमिका निभाने वाला है। यदि भारत इस अवसर का समुचित उपयोग करता है, तो वह डिजिटल लोकतंत्र और भारतीय मेधा को विश्व मंच पर स्थापित कर सकता है। साथ ही नई दिल्ली में होने वाला यह समिट उस भविष्य की दिशा तय करने का अवसर प्रदान करता है। यदि ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का आदर्श व्यवहार में उतारा गया, तो भारत की एआई यात्रा केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक कल्याण की कहानी बनेगी। भारत ने पिछले एक दशक में जो डिजिटल क्रांति देखी है, वह अभूतपूर्व है। आधार, यूपीआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), जनधन खातों और मोबाइल कनेक्टिविटी के संयोजन ने करोड़ों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। यही समेकित डिजिटल ढांचा आज भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट इस बात को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा कि कैसे एक विकासशील देश तकनीक को जनकल्याण का माध्यम बना सकता है। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि एआई केवल कॉरपोरेट मुनाफे का औजार न बने, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु प्रबंधन और सार्वजनिक प्रशासन में व्यापक बदलाव लाए। सम्मलेन का केंद्रीय सूत्र ‘लोग, पृथ्वी और प्रगति’ भारत की नीति-परक सोच को दर्शाता है। ‘लोग’ का अर्थ है समावेशी विकास। डिजिटल विभाजन कम करना, ग्रामीण और वंचित समुदायों तक एआई उपकरणों की पहुंच सुनिश्चित करना, भाषा आधारित एआई मॉडल विकसित करना, ये सभी प्राथमिकताएं भारत की सामाजिक वास्तविकताओं से जुड़ी हैं। ‘पृथ्वी’ का आशय पर्यावरणीय स्थिरता से है। एआई डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत, कार्बन फुटप्रिंट और हरित कंप्यूटिंग पर वैश्विक चर्चा इस मंच पर होगी। भारत यह संदेश देना चाहता है कि तकनीकी प्रगति पर्यावरणीय संतुलन के साथ ही सार्थक है। ‘प्रगति’ का तात्पर्य नवाचार और आर्थिक विकास से है। दअरसल एआई आधारित स्टार्टअप, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट भारत को 21वीं सदी की ज्ञान अर्थव्यवस्था में अग्रणी बना सकते हैं। जैसे-जैसे एआई हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन रही है, इसके जोखिम भी सामने आ रहे हैं, जिसमें डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदमिक पक्षपात, गलत सूचना और रोजगार पर प्रभाव। ऐसे में एआई गवर्नेंस की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। एआई गवर्नेंस का अर्थ है, ऐसे नियम, नीतियां और प्रक्रियाएं जो सुनिश्चित करें कि एआई का विकास और उपयोग पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायपूर्ण हो। इसमें डेटा संरक्षण, साइबर सुरक्षा, नैतिक मानकों और कानूनी अनुपालन का समावेश होता है। इसलिए एआई क्रांति में जो देश जितना आगे होगा, उसे उतना ही रणनीतिक लाभ प्राप्त होगा। रक्षा, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और कूटनीति सभी क्षेत्रों में एआई निर्णायक भूमिका निभाने वाला है। यदि भारत इस अवसर का समुचित उपयोग करता है, तो वह डिजिटल लोकतंत्र और भारतीय मेधा को विश्व मंच पर स्थापित कर सकता है। परंतु यह भी ध्यान रखना होगा कि तकनीकी श्रेष्ठता का अर्थ मानवीय मूल्यों से विचलन नहीं होना चाहिए। भारत की पहचान सदैव समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण की रही है। यदि एआई विकास इसी मूल भावना के साथ आगे बढ़ता है, तो भारत न केवल एआई महाशक्ति बनेगा, बल्कि एक नैतिक और जिम्मेदार वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में भी स्थापित होगा। अंतत:, एआई केवल मशीनों का विकास नहीं है; यह मानवता के भविष्य का निर्माण है। इसलिए भारत इस मंच पर यह रेखांकित करेगा कि एआई को नियंत्रित करने के लिए कठोर लेकिन संतुलित ढांचा आवश्यक है, ऐसा ढांचा जो नवाचार को बाधित न करे, लेकिन समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करे। हालांकि देखा जाए तो भारत के सामने दोहरी जिम्मेदार है। एक ओर उसे वैश्विक निवेश और नवाचार को आकर्षित करना है, दूसरी ओर उसे अपने नागरिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा भी करनी है। ‘एआई फॉर ऑल’ का मंत्र तभी सार्थक होगा, जब तकनीक तक समान पहुंच सुनिश्चित की जाए और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जो अवसर देता है कि वह पश्चिम और पूर्व के बीच एक सेतु की भूमिका निभाए और ऐसा मॉडल प्रस्तुत करे जो न तो अंधाधुंध नियंत्रण पर आधारित हो, न ही पूरी तरह बाजार के हवाले। एक संतुलित, मानवीय और टिकाऊ एआई पारिस्थितिकी तंत्र ही भविष्य का रास्ता है। समय की मांग यही है कि यह शिखर सम्मेलन केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस कार्ययोजना, वैश्विक सहयोग और साझा नैतिक मानकों की दिशा में ठोस कदम उठाए। यदि इस मंच से साझा मानकों, सहयोगात्मक रोडमैप और ठोस नीतिगत पहल का उदय होता है, तो यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होगा। एआई का भविष्य अभी लिखा जा रहा है और इस सक्वमेलन को ओयाजित कर भारत इस भविष्य की पटकथा में एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है, एक ऐसा भविष्य, जहां तकनीक मानवता की सेवा में हो, पृथ्वी की रक्षा करे और प्रगति को समावेशी बनाए। एआई का भविष्य तय करने की इस दौड़ में भारत यदि दूरदर्शिता और संतुलन दिखाता है, तो वह न केवल तकनीकी महाशक्ति बनेगा, बल्कि वैश्विक नैतिक नेतृत्व भी स्थापित करेगा।

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