-डॉ. ओपी त्रिपाठी
इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में दुनिया जिस तकनीकी क्रांति के मुहाने पर खड़ी है, उसका नाम है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। यह केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा और शासन व्यवस्था को पुनर्परिभाषित करने वाली शक्ति है। ऐसे निर्णायक समय में भारत ने यदि आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, तो उसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूरदर्शी विजन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ऐसे कई अहम और निर्णायक कदम उठाए हैं, जो देश को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं। मजबूत डिजिटल आधार, नीति स्पष्टता, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप समर्थन और अब वैश्विक साझेदारी भी, ये सभी मिलकर भारत की एआई की दुनिया में बुलंद पहचान बना रहे हैं। यह पीएम मोदी का विजन ही है कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े एआई एक्सपो का आयोजन कर रहा है। यह विजन केवल तकनीक आयात-निर्यात करने का नहीं, बल्कि भारत को एआई का निर्माता, नवोन्मेषक और निर्यातक बनाने का है। भारत के सर्वम एआई ने चैट-जीपीटी और जैमिनी एआई को पछाड़कर हाल ही में अपनी श्रेष्ठता साबित की है।
किसी भी तकनीकी क्रांति की सफलता मजबूत आधारभूत संरचना पर निर्भर है। मोदी सरकार ने 2014 के बाद “डिजिटल इंडिया” के माध्यम से जो डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया, उसी को चरितार्थ होता आज हम देख रहे हैं। जनधन, आधार, मोबाइल (जैम ट्रिनिटी), यूपीआई, भारतनेट, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इनोवेशन ही आज एआई क्रांति की रीढ़ बन रहे हैं। करोड़ों लोगों का डिजिटलीकरण, डिजिटल भुगतान की व्यापकता और सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन विस्तार ने डेटा और तकनीकी प्रयोगों के लिए अभूतपूर्व मंच तैयार किया। एआई को गति देने के लिए यह डिजिटल आधारशिला निर्णायक सिद्ध हो रही है। इसी मजबूत आधार के बलबूते भारत दुनिया का सबसे बड़ा चार दिवसीय एआई एक्सपो आयोजित कर रहा है। जिसमें दुनियाभर से एआई एक्सपर्ट, स्टार्टअप्स और रिसर्चर भाग ले रहे हैं।
मोदी सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल एक फैशनेबल शब्द नहीं माना, बल्कि इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया। राष्ट्रीय एआई मिशन और नीति ढांचे के माध्यम से शोध, स्टार्टअप, उद्योग और अकादमिक जगत को एक साझा मंच प्रदान किया गया। जब लीडर का विजन स्पष्ट होता है तो स्पष्ट मार्गदर्शन मिलता है। इन्हीं दिशानिर्देशों ने यह सुनिश्चित किया कि नवाचार हो, परंतु जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ। “रिस्पॉन्सिबल एआई” पर जोर देकर भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि तकनीकी प्रगति मानव मूल्यों से समझौता किए बिना भी संभव है।
एआई केवल सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि शक्तिशाली हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर क्षमता पर भी निर्भर करता है। मोदी सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग में बड़े निवेश को प्रोत्साहित किया। आज से दस साल पहले भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की सोच ही बहुत सीमित थी। लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित किया। इससे भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि तकनीकी उत्पादन का केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। एआई के लिए आवश्यक कंप्यूटेशनल शक्ति का स्वदेशी निर्माण भारत की रणनीतिक मजबूती को और सुदृढ़ बना रहा है।
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप संस्कृति बेहद सीमित थी और यूनिकॉर्न सिर्फ 4 थे, जबकि आज डी.पी.आई.आई.टी. से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से ज्यादा और यूनिकॉर्न करीब 118 हो चुके हैं। यह बदलाव दिखाता है कि बीते एक दशक में भारत ने उद्यमिता को बड़े शहरों से निकालकर गांव-कस्बों तक पहुंचाया है और देश को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने की दिशा में निर्णायक छलांग लगाई है। मोदी सरकार की नीतियों स्टार्टअप इंडिया, आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, कर प्रोत्साहन और फंडिंग सपोर्ट ने एआई आधारित स्टार्टअप्स को पंख दिए हैं। हेल्थटेक, एग्रीटेक, फिनटेक और एडटेक क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स एआई के माध्यम से वैश्विक समाधान विकसित कर रहे हैं। यह केवल रोजगार सृजन नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की भागीदारी को मजबूत करने वाला कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 के अपने संकल्प में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सबसे बड़ा ‘गेम-चेंजर’ करार दिया है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान एक विशेष इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के लिए एआई का ‘कोड’ खुद लिखेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत 2047 के संकल्प को नई ऊर्जा देते हुए ऐलान किया है कि भारत जल्द ही दुनिया की टॉप तीन एआई सुपरपावर्स में शामिल होगा।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल शक्ति की जमकर सराहना की। मैक्रों ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जो दुनिया का कोई और देश नहीं कर पाया। भारत की तारीफ करने के साथ ही एक तरह से कांग्रेस पर तंज कसते हुए मैक्रों ने कहा कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बना रहा, बल्कि समाज को बदलने वाली क्रांति की नींव रख रहा है।
मोदी सरकार की खासियत यह रही है कि उसने एआई को केवल उद्योग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शासन और जनसेवा में भी इसका उपयोग बढ़ाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऐसे कितने ही नवाचार हैं, जो मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान तेजी से बढ़े हैं। कृषि पूर्वानुमान, मौसम विश्लेषण, स्वास्थ्य जांच, कर प्रशासन और सुरक्षा निगरानी में एआई आधारित समाधान अपनाए जा रहे हैं। इससे नीतियों की सटीकता, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। आम नागरिक को तेज, सस्ती और प्रभावी सेवाएं मिल रही हैं। यह “टेक्नोलॉजी फॉर ऑल” के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है।
विविधता में एकता वाले भारत में भाषाई विविधता एक बड़ी चुनौती रही है। भारत की इसी भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने एआई को भारतीय भाषाओं में विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। वॉइस असिस्टेंट, ट्रांसलेशन टूल्स और लोकल लैंग्वेज मॉडल्स के माध्यम से तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल हुई है। इससे डिजिटल विभाजन कम हुआ और ग्रामीण भारत भी एआई क्रांति का हिस्सा बनने लगा है। भारतीय भाषाओं में एआई का विकास न केवल समावेशिता सुनिश्चित की है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की विशिष्ट पहचान भी स्थापित की है।
राष्ट्रपति मैक्रों का यह बयान परोक्ष रूप से कांग्रेस राज की पुरानी व्यवस्थाओं पर एक बड़ा कटाक्ष है। कांग्रेस काल में दशकों तक जिस तबके को सिस्टम से बाहर रखा गया, आज वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में डिजिटल इंडिया की मुख्यधारा में है। उन्होंने जिस प्रकार से 10 साल पहले की नो एक्ससे वाली व्यवस्था का जिक्र किया, वह सीधे तौर पर पिछले शासनकालों की विफलता और वर्तमान मोदी सरकार की ‘डिजिटल क्रांति’ की सफलता पर मुहर लगाता है।
सभी जानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक वैश्विक विषय है और मोदी सरकार ने इसे कूटनीतिक प्राथमिकता दी है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने एआई के नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा और वैश्विक सहयोग की वकालत की है। प्रमुख तकनीकी देशों के साथ साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और निवेश समझौते भारत को एआई की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिला रहे हैं। यह रणनीति भारत को केवल सहभागी नहीं, बल्कि नीति-निर्माता राष्ट्र के रूप में स्थापित कर रही है।
–चिकित्सक एवं लेखक


