Friday, August 29, 2025
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डामडिम और उदलाबाड़ी में फिर हाथियों का आतंक, कई बस्तियों में तबाही

 

मालबाजार/उदलाबाड़ी। भोजन की तलाश में जंगल से निकलकर हाथियों के झुंड द्वारा बस्ती क्षेत्रों में बार-बार हमले की घटनाएं थम नहीं रही हैं। बामनडांगा के बाद अब डामडिम के खागड़ाबस्ती और उदलाबाड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत बांसबाड़ी गांव हाथियों के उत्पात का नया शिकार बना है। शुक्रवार देर रात और शनिवार तड़के दो अलग-अलग हमलों में हाथियों ने घरों और खेतों को भारी नुकसान पहुंचाया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, 15 से 20 हाथियों का एक दल जंगल से निकलकर गांव में घुसा और बस्तियों में कहर बरपाया।

खागड़ाबस्ती में, हाथियों के झुंड में से एक दंतैल हाथी ने बगड़ा राय नामक निवासी के रसोईघर में घुसकर जमा खाद्य सामग्री खा ली और रसोईघर की छत भी क्षतिग्रस्त कर दी। उदलाबाड़ी के बांसबाड़ी गांव में, हाथियों ने सुपारी, केले के बागान और हाल ही में रोपे गए धान के खेतों को रौंद दिया। सुपारी के करीब 50 पेड़ उखाड़ दिए, और सैकड़ों केले के पेड़ क्षतिग्रस्त हो गए। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार की रात अपालचांद जंगल से हाथियों का यह झुंड खागड़ाबस्ती में प्रवेश किया। मालबाजार वन्यजीव विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पटाखे फोड़कर हाथियों को जंगल की ओर वापस खदेड़ने में सफल हुई। लेकिन गहराती रात में एक दंतैल हाथी दोबारा लौट आया और बगड़ा राय के घर में तबाही मचाई। इससे पहले कि सुबह हो, यही झुंड चेल नदी पार कर उदलाबाड़ी के बांसबाड़ी गांव में पहुंचा। वहां संतोष छेत्री और काली छेत्री के बागानों में जमकर उत्पात मचाया।

गांव के दो युवकों, पलाश दे सरकार और अनिश घिमिरे ने बताया कि उन्होंने कई बार रेंज ऑफिस में फोन किया, लेकिन कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। अंतत: ग्रामीणों ने खुद ही पटाखे फोड़कर हाथियों को भगाया। घाटना से आक्रोशित ग्रामीण शनिवार को तारघेरा रेंज कार्यालय पहुंचकर लिखित रूप में क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए फॉर्म भरे। तारघेरा रेंज के अधिकारी स्वपन कुमार राय ने बताया कि, बांसबाड़ी के निवासी हमारे कार्यालय आए और उचित मुआवजे की मांग की। हमने उच्च अधिकारियों को सूचित किया है। वन विभाग के मालबाजार रेंजर अंकन नंदी ने भी बताया कि फिलहाल इलाके में हाथी नहीं हैं, लेकिन विभाग पूरी नजर बनाए हुए है।

यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों क्षेत्रों में हमला करने वाला हाथियों का झुंड एक ही था या अलग-अलग। लेकिन चूंकि दोनों गांव बांसबाड़ी और खागड़ाबस्ती तारघेरा और अपालचांद रेंज से बहुत दूर नहीं हैं, इसलिए अधिकारियों ने एक ही झुंड द्वारा दोनों हमलों की संभावना को नकारा नहीं है।

 

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