प्रेम शर्मा
बजट को लेकर वैसे भी आम आदमी की सोच केवल मंहगाई और बेरोजगारी रोकने तक टिकी रहती है। जबकि पक्ष और विपक्ष हमेशा की तरह बजट अपना राग अलापता नजर आया। सरकारी नौकरी पेशा, व्यापारी, उघोगपति और अन्य संवर्ग हमेशा बजट को लेकर अपने हानि लाभ के हिसाब से चर्चा, प्रतिक्रिया देते रहे है। यही बॉत 2026 के केन्द्रीय आम बजट को लेकर सामने आ रही है। विपक्ष और सरकारी सेवकों के नेतृत्व ने जहॉ आम बजट 2026 को एक सिरे से अलाभकारी, आदूदर्शी बताया है वही सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं, केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों ने जहॉ जमकर आम बजट की सराहना करते हुए इसे दूरगामी लाभकारी बताया है। बहरहाल आम जनता जो दो जून के लिए रोजी रोटी के लिए संघर्ष कर रही है उसके लिए बजट ना रोने जैसा है औ न ही हॅसने जैसा है। बजट में नशें पर भारी टैक्स लादकर बड़ा प्रहार किया गया है। लेकिन इसका फायदा एक बार फिर इस व्यापार को चलाने वाले दिग्गजों के खाते में दर्ज होगा। वैसे सरल शब्दों में कहे तो बजट एक ऐसा प्रयास है जो पारंपरिक राह से ज्यादा भटकता नहीं है, बुनियादी बातों पर कायम रहता है और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के लक्ष्यों के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण बनाए रखता है। बहरहाल इसे एक निराशाजनक प्रयास कहा जा सकता है। बाज़ारों से पूछें तो वे इसे और भी बुरा कहेंगे, खासकर शेयरों में आई भारी गिरावट को देखते हुए, जो केंद्रीय बजट पेश होने के बाद पिछले छह वर्षों में देखी गई सबसे बड़ी गिरावट थी। महंगाई और बेरोजगारी को लेकर केन्द्रीय बजट में सरकार की कोई स्पष्ट मंशा सामने नही आई है। अगर बजट की बारीकियॉ आम जनता को समझान ेमें सत्तारूढ़ पार्टी समझाने में असफल रही तो इसका फायदा आगामी चुनावों में विपक्ष को मिले ऐसी सम्भावनाओं को नकारा नही जा सकता।
वैसे तो इस बजट से अलग-अलग सेक्टर से जुड़े देश के नागरिकों की ढेरों उम्मीदें जुड़ी हुई थीं। खासतौर से टैक्स पेयर्स को टैक्स स्लैब में कुछ नए बदलाव और कुछ नई छूट की आशा निराशा में तब्दील कर दी गई। हालांकि कुछ सेक्टर्स में कुछ बड़ी रियायत दिए जाने की घोषणा की गई है। बजट में बड़े और दीर्घकालिक सुधार पर सरकार गति को बनाए रखने के संकेत दिये गए है। हर बार की तरह शराब, सिगरेट व तंबाकू प्रेमियों की जेब ढीली होगी। नये प्रावधानों में विदेशों में पढ़ रहे छात्रों को भेजे जाने वाले पैसे पर टीसीएस कम होगा। माइक्रोवेव्स, सोलर पैनल, चमड़ा उत्पाद, 17 दवाइयां तथा सात दुर्लभ बीमारियों की दवाएं सस्ती होंगी हालांकि, एसटीटी बढ़ाने के मुद्दे पर शेयर बाजार को बजट रास नहीं आया।विदेश यात्रा पैकेज पर भी छूट दी गई है। आने वाले महीनों में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे, उनका भी बजट में खास ख्याल रखा गया है। दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक व अन्य उत्पादों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दुर्लभ रेयर अर्थ पर ध्यान केंद्रित कर रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें तमिलनाडु-केरल का खास ध्यान रखा गया। आसन्न चुनाव वाले इन राज्यों के मछुआरों व नारियल उत्पादकों को प्रोत्साहन व छूट दी गई है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए इस उद्योग में चालीस हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। वहीं सस्ती दवाओं के लिए ‘बॉयोफार्मा शक्ति योजना’ के लिए दस हजार करोड़ रुपये का प्रावधान होगा, जिससे देश में मधुमेह व कैंसर की सस्ती दवाइयां उपलब्ध हो सकेंगी। दूसरी ओर आसन्न चुनाव वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, असम व तमिलनाडु को हाई-स्पीड ट्रेन कॉरिडोर का लाभ देने का प्रस्ताव है। वहीं असम को बौद्ध सर्किट का लाभ दिया गया है। यह योजना बौद्ध तीर्थों के विकास, यात्री सुविधाओं के विस्तार तथा यहां तक कि तीर्थयात्रियों की पहुंच आसान बनाने की कोशिश है। वहीं दूसरी ओर डिजिटल मनोरंजन क्रांति हेतु रचनात्मक बढ़ाने वाली ‘ऑरेंज इकॉनोमी’ को भी प्राथमिकता बनाया गया है ताकि इस क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि की जा सके। अप्रैल 26 तक नया आयकर कानून लागू करने की बात बजट में कही गई है, जिसमें आयकर रिटर्न की फाइलिंग से जुड़ी समय सीमा और नियमों में बदलाव होगा। निश्चित रूप से दुनिया आपूर्ति शृंखला में जारी वैश्विक उथल-पुथल और टैरिफ युद्ध के बीच राजग सरकार ने आम बजट में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी है। साथ ही आजादी के सौ साल पूरे होने पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बजट की दशा-दिशा पर तीन शब्दों में संदेश दिया कि यह स्किल, स्केल और सस्टेनबिलिटी का बजट है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विकास व आत्मनिर्भरता के लिए बजट है। बजट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं, किसानों, निवेशकों का जिक्र करते हुए दावा किया कि ये बजट भारत के असली संकटों से अनजान है। राहुल गांधी ने कहा है कि केंद्रीय बजट में भारत के सामने मौजूद वास्तविक संकटों से आंख मूंद ली गई। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि इसमें आम आदमी के लिए कुछ खास नहीं है। यही नही इस बजट से मिडिल क्लास को खासी उम्मीदें थीं. आयकर में छूट और महंगाई पर काबू जैसे ऐलान के इंतजार कर रहे थे। सीनियर सिटीजन को भी रेल किराये में छूट समेत की उम्मीदें थीं। लेकिन वित्त मंत्री आम आदमी से जुड़े मुद्दों से किनारा करते हुए सरकार के मिशन 2047 पर तथस्थ दिखाई पड़ी। कुल मिलाकर यह बजट मीडिल क्लास, बेरोजगार और कम आय वर्ग के लिए रोना और हॅसना मना जैसे वाक्य का पर्याय साबित हुआ है।



