Friday, February 20, 2026
spot_imgspot_img

Top 5 This Week

Related News

राज्य सभा चुनाव में बढ़ेगी एनडीए की ताकत

-राजेश माहेश्वरी
राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव का इस साल होने वाला है। पूरे साल में करीब 72 से 75 सीटें खाली हो रही हैं, जो अप्रैल, जून, जुलाई और नवंबर में रिटायरमेंट से होंगी। अभी फरवरी 2026 में राज्यसभा की कुल 245 सीटों में बीजेपी की 103 हैं, कांग्रेस की 27, तृणमूल कांग्रेस की 12, आप की 10, डीएमके की 10, बीजेडी की 7, वाईएसआरसीपी की 5 और एआईएडीएमके की 7 सीटें हैं। नॉमिनेटेड 7 हैं और कुल एनडीए की ताकत 121 के आसपास है, जबकि इंडिया ब्लॉक के पास 80 सीटें हैं। लेकिन आने वाले चुनावों से यह आंकड़ा काफी हिलने वाला है।
राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर चुनाव है। महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और शरद पवार की एनसीपी के पास 2 राज्यसभा सीटें हैं। इसके अलावा कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और आरपीआई के पास एक-एक सीटें है।
नंबर गेम्स के अनुसार सत्तारूढ़ एनडीए को 7 से 9 सीटों का फायदा होने की उम्मीद है, जिससे उनकी ताकत 145 तक पहुंच सकती है। वहीं, इंडिया ब्लॉक को 5 सीटों का नुकसान हो सकता है, जो उनकी संख्या को 75 के आसपास ला देगा। सबसे पहले आगामी 16 मार्च को 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जो 10 राज्यों से हैं। महाराष्ट्र से 7, ओडिशा से 4, तमिलनाडु से 6, पश्चिम बंगाल से 5, असम से 3, बिहार से 5, छत्तीसगढ़ से 2, हरियाणा से 2, हिमाचल प्रदेश से 1 और तेलंगाना से 2। ये सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं। साल के बाकी चुनावों में और 35-38 सीटें शामिल होंगी, जो कुल 22 राज्यों से हैं, जैसे उत्तर प्रदेश से 10, कर्नाटक से 4, गुजरात से 4, आंध्र प्रदेश से 4 सीटें।
राज्यसभा की वोटिंग के बाद 37 नए सांसद जुड़ेंगे। दस राज्यों की खाली सीटों में कांग्रेस के लिए हिमाचल एक बड़ा ठौर होगा। इस साल 72 सीटों पर चुनाव होंगे और इस तरह भाजपा का पलड़ा थोड़ा सा और भारी हो सकता है।
हाल के विधानसभा चुनावों ने एनडीए की पोजीशन मजबूत की है। मसलन, महाराष्ट्र में एनडीए के 228 विधायक हैं (बीजेपी 131, शिवसेना-शिंदे 57, एनसीपी-अजित 40), जो 7 सीटों में से 4-5 जीत सकता है यानी पहले से ज्यादा। बिहार में एनडीए को एक एक्स्ट्रा सीट मिल सकती है, जहां पहले से 3 थे, अब 4। आंध्र प्रदेश में 3 गेन, गुजरात में 1, ओडिशा में 2, राजस्थान में 1। ये गेन विधानसभा स्ट्रेंथ से आते हैं, जैसे महाराष्ट्र में एनडीए ने 2025 चुनाव जीता, बिहार में एनडीए मजबूत, हरियाणा में बीजेपी, झारखंड में बीजेपी. हालांकि, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में 1-1 सीट का नुकसान हो सकता है।
राज्यसभा के सदस्य (सांसद) राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायकों की वोटिंग से चुने जाते हैं। यानी, केंद्र में कौन सी पार्टी मजबूत होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हर राज्य की विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक हैं। अगर विधानसभा में आपकी पार्टी की ताकत बढ़ती है, तो राज्यसभा में भी आपकी सीटें बढ़ती हैं। राज्यसभा की सीटें हर राज्य में तय होती हैं। जैसे महाराष्ट्र से 19 सीटें, लेकिन चुनाव साल दर साल कुछ सीटों पर होते हैं, जब पुराने सदस्य रिटायर होते हैं। चुनाव में जीतने के लिए, हर उम्मीदवार को एक निश्चित संख्या में वोट चाहिए, जिसे ‘क्वोटा’ कहते हैं।
राज्यसभा के सदस्य विधानसभा के इलेक्टेड मेंबर्स चुनते हैं, इसलिए हर राज्य में विधायकों की संख्या से कोटा तय होता है। यह इसलिए है कि हर सीट के लिए वोट्स बराबर बंटें और कोई पार्टी ज्यादा वोट्स से ज्यादा सीटें जीत सके। अगर किसी उम्मीदवार को कोटा से एक वोट भी कम मिला, तो वो हार जाता है।
कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक को सबसे ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि 5 से 6 सीटें कम हो सकती हैं। जैसे गुजरात में कांग्रेस की 1 सीट खत्म हो सकती है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल को लॉस, कर्नाटक में कांग्रेस को 1 कम। बीजेडी ओडिशा में 1-2 कम, वाईएसआरसीपी आंध्र में 3 कम, सीपीआई एम पश्चिम बंगाल से 1 कम। ये पार्टियां जहां विधानसभा में कमजोर हुईं, वहां सीटें गंवाएंगी।
वहीं, फायदे वाली पार्टियां एनडीए दल की हो सकती हैं। इनमें बीजेपी को 7-9 सीटों का फायदा हो सकता है यानी कुल एनडीए 145 तक पहुंच सकती है। कांग्रेस को डीएमके तमिलनाडु में 1-2 एक्स्ट्रा सीट का फायदा हो सकता है, लेकिन ओवरऑल इंडिया गठबंधन डाउन रहेगा।
महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटों पर चुनाव है, जिसमें से एनडीए के 6 सीटें मिल सकती है तो विपक्षी गठबंधन महायुति के सिर्फ एक सीट मिलने की संभावना है। राज्य में कुल 286 विधानसभा सीटें है, जिसमें से 2 सीटें खाली हैं। इस लिहाज से एक राज्यसभ सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।
मौजूदा समय में बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं। एनडीए के 235 विधायक बन रहे हैं, जिसके दम पर 6 सीटें आसानी से जीत सकती है। बीजेपी चार सीटें तो शिंदे और अजित पवार की पार्टी को एक-एक सीट जीत सकती है। शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की 16 और कांग्रेस के 20 विधायक हैं। इस तरह से तीनों दलों के कुल 46 विधायक।सीपीआई (एम) और एसके (एम) का एक-एक विधायक है। अन्य छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन मिलने पर यह संख्या कुछ बढ़ सकती है। ऐसे में एक सीट विपक्ष मिलकर सकती है। शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस में से किसी एक दल को की यह सीट मिल सकती है, जिसके चलते शरद पवार की सीटें और उद्धव ठाकरे के लिए सियासी नुकसान होगा।
बिहार की पांच राज्यसभा सीट पर चुनाव होने हैं, जिसमें एनडीए आसानी से 4 सीटें जीत सकती है और एक सीट विपक्ष को मिल सकती है। तमिलनाडु में की मौजूदा विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें जीत लेगा और एक सीट एआईएडीएमके भी बचा ले जाएगा, लेकिन एक सीट पर मुकाबला हो सकता है। ऐसे ही पश्चिम बंगाल की पांच सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगा, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है। ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट से बीजेडी को संतोष करना पड़ सकता है।
एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके अलावा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह से लेकर उपेंद्र कुशवाहा का भी टर्म पूरा हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (कर्नाटक) के लिए री-इलेक्शन की कोशिश हो रही है, लेकिन स्पेकुलेशन है कि वह नहीं लौटेंगे। दिग्विजय सिंह (मध्य प्रदेश) को कमलनाथ की जगह थर्ड टर्म नहीं मिलेगा। एचडी देवगौड़ा (कर्नाटक) जेडीएस के पास नंबर नहीं है इसलिए रिटायरमेंट संभव है। शरद पवार (महाराष्ट्र) टर्म एंड, एनसीपी शरद पवार कमजोर, रंजन गोगोई (नॉमिनेटेड) मार्च में रिटायर, परिमल नथवानी (आंध्र) बीजेपी सेकंड टर्म नहीं देगी, बिकाश रंजन भट्टाचार्य सीपीआई एम। ऐसे में देखना है कि इन दिग्गज नेताओं में से किसकी वापसी होती है, इसके अलावा किस दल को किसे फायदा और किसे नुकसान होगा। कुल मिलाकर, 2026 राज्यसभा में एनडीए और मजबूत होगा, जो विधेयकों पास करने में आसानी देगा। विपक्ष को रणनीति बदलनी पड़ेगी।
-राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार

Popular Coverage