नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से अपने आवास पर खास बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने छात्रों में बढ़ते स्क्रीन टाइम, नशे की समस्या, खेलकूद के महत्व और बच्चों के समग्र विकास जैसे अहम मुद्दों पर शिक्षकों के साथ विचार साझा किए।
बच्चों का बचपन बनाए रखना शिक्षक की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के दौर में सिर्फ सिलेबस पूरा कराना काफी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें किताबों से बाहर निकलकर बच्चों की जिंदगी में शामिल होना पड़ेगा। बच्चों का बचपन किसी भी हाल में मरने नहीं देना चाहिए और यह काम सिर्फ एक शिक्षक ही कर सकता है।”
स्क्रीन टाइम की लत से बचाने के लिए मैदान का खेल जरूरी
छात्रों में मोबाइल और स्क्रीन की लत पर चिंता जताते हुए पीएम ने सुझाव दिया कि बच्चों को मैदानी खेलों से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल का मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान में जाकर पसीना बहाना है। इसके साथ ही क्रिएटिविटी और रचनात्मक गतिविधियों को बच्चों की आदत का हिस्सा बनाना होगा।
नशे के खिलाफ शिक्षकों को सतर्क रहने की सलाह
ड्रग्स के बढ़ते खतरे पर बात करते हुए पीएम मोदी ने शिक्षकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के व्यवहार में आने वाले सूक्ष्म बदलावों (Minute Changes) पर लगातार नजर रखें ताकि किसी भी खतरे को समय रहते पहचाना जा सके।
जब पीएम ने पूछा- ‘मैं विद्यार्थी होता तो मुझे क्या सिखातीं?’
बातचीत के दौरान माहौल उस वक्त हल्का-फुल्का हो गया जब पीएम मोदी ने एक शिक्षिका से पूछा, “अगर मैं आपका छात्र होता और एक अच्छा वक्ता बनना चाहता, तो आप मुझे क्या सलाह देतीं?” इस पर शिक्षिका ने मुस्कुराते हुए कहा कि कुशल वक्ता बनने के लिए सबसे जरूरी आत्मविश्वास है, जो निरंतर अभ्यास से आता है।
काशी में कैंसर स्क्रीनिंग का साझा किया अनुभव
पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां ब्रेस्ट कैंसर के प्रति चलाए गए जागरूकता अभियान के कारण अब महिलाएं खुद आगे आकर जांच करा रही हैं। उन्होंने एक ही दिन में रिकॉर्ड संख्या में हुई स्क्रीनिंग को एक सुखद अनुभव बताया।



