दार्जिलिंग। मानसून सत्र के पहले ही दिन दार्जिलिंग के सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट ने संसद में संसदीय नियम 377 के अंतर्गत दार्जिलिंग के लिए वैकल्पिक राजमार्ग और रोपवे परियोजनाओं की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग, जो कि भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, आज गंभीर बुनियादी ढांचे की समस्याओं से जूझ रहा है, जिससे इसकी पहुंच और आकर्षण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
श्री बिष्ट ने बताया कि वर्तमान में दार्जिलिंग को जोड़ने वाला मुक्चय मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 110 (एनएच-110) है, जो ब्रिटिश काल में बना था। यह मार्ग अब अपनी क्षमता से कहीं अधिक प्रतिदिन लगभग 15,000 वाहनों का बोझ झेल रहा है। यह संक्चया इसकी निर्धारित वहन क्षमता से दोगुनी है, जिससे खासकर स्कूल-कॉलेज और कार्यालय समय के दौरान तथा पर्यटक सीजन में भारी जाम लग जाता है। इस गंभीर समस्या का समाधान सुझाते हुए सांसद ने सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग तक बालासन के रास्ते वैकल्पिक सड़क मार्ग निर्माण की मांग की है। यह नया मार्ग न केवल एनएच-110 पर बोझ कम करेगा, बल्कि कर्सियांग, मिरिक, सोनादा, रंगबुल, धोत्रे-पुस्सुंबेंग, सुखिया पोखरी और पोखरेबूंग घाटी जैसे ग्रामीण इलाकों को भी सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे क्षेत्र में न केवल आवाजाही आसान होगी, बल्कि आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
दार्जिलिंग के दुर्गम पर्वतीय भूगोल को ध्यान में रखते हुए श्री बिष्ट ने पर्वतमाला परियोजना के तहत रोपवे कनेक्टिविटी विकसित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने संसद में घूम से दार्जिलिंग, दार्जिलिंग से बिजनबाड़ी तथा डेलो से कालिक्वपोंग, रेली और चित्रे तक रोपवे प्रणाली की स्थापना का प्रस्ताव रखा। ये परियोजनाएं न केवल तनावमुक्त और कुशल यात्रा प्रदान करेंगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होंगी। साथ ही, दार्जिलिंग को एक विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में और अधिक सुदृढ़ करेंगी। श्री बिष्ट ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से दार्जिलिंग का बुनियादी ढांचा पूरी तरह रूपांतरित होगा और यह क्षेत्र सुगम संपर्क और समावेशी विकास का आदर्श बन सकेगा।



