Sunday, January 25, 2026
spot_imgspot_img

Top 5 This Week

Related News

सौरव ने कहा- भविष्य में कप्तान बनें ऋचा, ममता बोलीं- प्यार से जीतेगी दुनिया

कोलकाता। ईडन गार्डन्स में शनिवार को बंगाल की विश्वकप विजेता क्रिकेटर ऋचा घोष को क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) की ओर से भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सीएबी अध्यक्ष सौरव गांगुली, क्रीड़ा मंत्री अरूप विश्वास और पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पूरे मैदान में उत्सव जैसा माहौल था। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने इस मौके पर कहा कि वे भविष्य में ऋचा को भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं तीन आईसीसी टूर्नामेंट में कप्तान रहा, लेकिन विश्वकप नहीं जीत सका। ऋचा ने वह कर दिखाया। भारतीय टीम में उसका योगदान स्मृति या हरमनप्रीत से कम नहीं है। उम्मीद है कि एक दिन हम कह पाएंगे कि ऋचा भारतीय टीम की कप्तान है।” सौरव गांगुली ने यह भी कहा कि कुछ वर्ष पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे महिला क्रिकेट को समान गति देने की बात कही थी और आज वही सपना साकार हुआ है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऋचा को फूलों का हार और सोने का बैट भेंट करते हुए कहा कि ऋचा अभी बहुत युवा है, उस पर अनावश्यक दबाव न डालें। वह अपने साहस और प्रेम से बंगाल और दुनिया को जीतेगी। मानसिक शक्ति ही सबसे बड़ी ताकत है। मेहनत और लगन से सफलता अवश्य मिलेगी। ऋचा की सफलता के पीछे की प्रेरणादायक कहानी साझा करते हुए पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर झूलन गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 2013 में हमने जिला स्तर पर टैलेंट हंट शुरू किया था। तभी शिलिगुड़ी में अंडर-15 और अंडर-16 मुकाबलों में पहली बार ऋचा को देखा। मैंने सीएबी में कहा था कि इतनी प्रतिभाशाली खिलाड़ी मैंने पहले नहीं देखी। सौरव सर और अभिषेक सर ने उसका चयन वरिष्ठ टीम में करने का समर्थन किया, और वहीं से उसकी यात्रा शुरू हुई। 47 वर्षों बाद भारतीय महिला टीम का सपना ऋचा, हरमन और स्मृति ने पूरा किया है।

इस अवसर पर ऋचा के पिता मानवेंद्र घोष, जो सीएबी के अम्पायर हैं, को भी सम्मानित किया गया। सीएबी ने ऋचा को 34 लाख रुपये और एक स्वर्ण बैट भेंट किया। साथ ही राज्य सरकार ने उन्हें डीएसपी पद पर नियुक्त किया और ‘बंगभूषण’ सम्मान से अलंकृत किया। सिलीगुड़ी की गलियों से विश्व मंच तक का ऋचा घोष का सफर अब नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुका है।

Popular Coverage