कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को सोमवार को तीन वर्ष से अधिक समय बाद न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया गया है। विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार को आदेश जारी करते हुए पार्थ चटर्जी की रिहाई का निर्देश दिया। आदेश के बाद अदालत के दस्तावेज मुख्य न्यायिक अधिकारी तक पहुंचने पर उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। वर्तमान में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती पार्थ चटर्जी ने अदालत की सुनवाई में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया। अदालत के निर्णय के बाद उन्हें मुस्कुराते हुए देखा गया। संभावना है कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे मंगलवार को घर लौटेंगे। पार्थ चटर्जी को जुलाई, 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करोड़ों के शिक्षक भर्ती घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के दिन ही ईडी ने उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ नकद बरामद किए थे। इसके अलावा उनकी सहयोगियों से जुड़ी 12 अचल संपत्तियों के दस्तावेज और विद्यालयों में ग्रुप-डी कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित कई अहम कागजात भी जब्त किए थे। गिरफ्तारी के बाद से पार्थ चटर्जी ईडी, सीबीआई और न्यायिक हिरासत में रहे, बीच-बीच में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा गया।
इस वर्ष सितम्बर में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दी थी, हालांकि उच्चतम न्यायालय के 18 अगस्त के निर्देशों के कारण उनकी रिहाई तत्काल नहीं हो सकी। शीर्ष अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय करने और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद ही रिहाई की अनुमति दी थी। अदालत ने यह प्रक्रिया 14 नवम्बर तक पूरी करने का निर्देश दिया था। सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में 8वें गवाह की गवाही पूरी होने के बाद अदालत ने पार्थ चटर्जी की रिहाई का आदेश सुनाया। इस तरह, तीन वर्ष, तीन माह और 18 दिन बाद पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी अब जेल से बाहर आएंगे।



