4 साल बाद सुनी गई पिता की दलील
नई दिल्ली। बॉलीवुड से जुड़ी पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई असमय मृत्यु के प्रकरण में एक नया मोड़ सामने आया है। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो ने केस सीबीआई को सौंपने का महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह राजा भोसले की द्विसदस्यीय पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी को विधिवत प्राथमिकी दर्ज करने का स्पष्ट आदेश दिया है। उच्च न्यायालय के इस कड़े रुख के बाद अब इस पुराने मामले की नए सिरे से व्यापक जांच का रास्ता साफ हो गया है।
पिता की याचिका और अदालत के मुख्य निर्देश
उच्च न्यायालय का यह निर्णय मृतका के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर उस याचिका पर आधारित है, जिसमें उन्होंने साल 2020 में हुई अपनी बेटी की मौत के कारणों और परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने सीबीआई को निर्देशित किया है कि वह सबसे पहले सतीश सालियान का बयान आधिकारिक रूप से दर्ज करे। इसके साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता को यह विधिक स्वतंत्रता भी प्रदान की है कि यदि वे जांच एजेंसी द्वारा तैयार की जाने वाली अंतिम रिपोर्ट या निष्कर्षों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे उसे न्यायालय में चुनौती दे सकेंगे। पीड़ित परिवार के लिए इस आदेश को न्याय पाने की दिशा में एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
घटना का घटनाक्रम और पुरानी जांच से जुड़े विवाद
यह मामला 8 जून 2020 का है, जब मुंबई के मालाड स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से संदिग्ध हालत में नीचे गिरने के कारण दिशा सालियान की मृत्यु हो गई थी। घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने मामले को दुर्घटना मानते हुए एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज कर प्राथमिक छानबीन शुरू की थी। तत्कालीन पुलिस पड़ताल के बाद मामले को आत्महत्या का रूप देकर बंद करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए थे। हालांकि मृतका के पिता ने पुलिस की थ्योरी को खारिज करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ जघन्य अपराध के बाद उसकी हत्या की गई थी।


