Sunday, January 25, 2026
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आई-पैक विवाद : ईडी के विरोध में सड़क पर उतरीं ममता, कोलकाता में निकाली विरोध रैली

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परामर्श संस्था इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के विरोध में प्रदेश की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी शुक्रवार को सड़क पर उतर आईं। दक्षिण कोलकाता में उन्होंने एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व किया, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस की शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। ममता बनर्जी आठ बी बस स्टैंड इलाके से हाजरा मोड़ तक पैदल चलीं। उनके साथ राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री, सांसद, विधायक और पार्टी के कई प्रमुख नेता मौजूद थे। रैली के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।

यह विरोध मार्च एक दिन पहले की उस घटना के बाद निकाला गया, जब ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी अचानक आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पहुंच गई थीं। उस घटनाक्रम के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और तेज हो गया है। रैली में बंगाली सांस्कृतिक रंग भी साफ नजर आया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रसिद्ध गीत ‘आमी बांग्लाय गान गाइ’ गाया, जबकि कई महिलाओं ने शंखनाद किया। इससे विरोध प्रदर्शन एक राजनीतिक मार्च के साथ-साथ सांस्कृतिक उत्सव जैसा रूप लेता दिखा। अपनी पारंपरिक सफेद सूती साड़ी, शॉल और चप्पल में ममता बनर्जी जुलूस के आगे चलती रहीं। वह बीच-बीच में सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन करती दिखीं। बड़ी संख्या में लोग इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करते नजर आए।

रैली में तृणमूल कांग्रेस के अभिनेता-नेता और लोकसभा सांसद देव, अभिनेता सोहम चक्रवर्ती सहित बांग्ला फिल्म और टेलीविजन जगत के कई जाने-माने चेहरे भी शामिल हुए। उनकी मौजूदगी से भीड़ में उत्साह और बढ़ गया और राजनीति तथा सिनेमा का मेल एक बार फिर देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मार्च राज्यभर में प्रस्तावित आंदोलनों की पहली कड़ी है। पार्टी का संकेत है कि ममता बनर्जी अब राजनीतिक लड़ाई को अदालतों और बैठकों से बाहर निकालकर सड़कों पर ले जाना चाहती हैं। पार्टी नेताओं के अनुसार, जनआंदोलन और प्रतीकात्मक राजनीति वह क्षेत्र है, जहां ममता बनर्जी खुद को सबसे मजबूत मानती हैं।

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