Sunday, January 25, 2026
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आकाश में रविवार की रात दिखेगा अद्भुत नजारा, उल्‍काओं की होगी आतिशबाजी

भोपाल। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए रविवार का दिन बेहद खास होने जा रहा है। इस दिन पूरे भारत में रात के समय आकाश में अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। दरअसल रविवार की रात चमकदार उल्‍काओं की आतिशबाजी होने जा रही है। आप भी इस वर्ष की सबसे शानदार उल्का वर्षा (बौछार) को आकाश में चमकदार लाइन के रूप में देख सकते हैं। इस दौरान प्रति घंटे 100 से अधिक उल्काएं दिखाई दे सकती हैं। इस उल्का वर्षा को देखने का सबसे अच्छा समय रविवार लगभग रात 9 बजे से लेकर भोर का समय होगा। मप्र की नेशनल अवार्ड प्राप्‍त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने शनिवार को इस खगोलीय घटना के बारे में बताया कि उल्‍का की यह बौछार मिथुन या जेमिनी तारामंडल के सामने होगी। इस तारामंडल में उल्का बौछार होते दिखने के कारण इसका नाम जेमि‍नीड उल्‍कापात (जेमिनिड मेटिओर शॉवर) रखा गया। अन्य अधिकांश उल्का वर्षाओं के विपरीत, जेमिनिड्स उल्का वर्षा किसी कमेट से नहीं, बल्कि एक एस्‍टेरॉइड 3200 फेथॉन से संबंधित है। यह क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा करने में लगभग 1.4 वर्ष का समय लेता है।
उन्होंने बताया कि जब पृथ्‍वी दिसम्‍बर माह में इसके द्वारा छोड़े गये धूल से होकर गुजरती है तो धूल एवं चटटान हमारे वायुमंडल के उपरी भाग के संपर्क मे आकर जल जाती हैं। यही हमें उल्‍का बौछार के रूप में दिखाई देती है। सारिका ने बताया कि आम लोग इन्‍हें टूटते तारे कहते हैं, जबकि तारे तो करोड़ों किलोमीटर दूर होंते हैं, जबकि यह उल्‍का बौछार तो मात्र 100 किमी के दायरे में होती है, इसलिये इन्‍हें टूटता तारा मानना सही नहीं है।

कैसे देखें –आप शहर की रोशनी से दूर सुरक्षित अंधेरी जगह चुनें। उस स्‍थान पर पहुंचकर आंखों को अंधेरे के अनुसार ढ़लने के लिये 20 मिनिट का समय दें। उल्‍का वर्षा लगभग रात 9 बजे से उत्‍त्‍र पूर्व दिशा में देखी जा सकेगी। इसे देखने के लिए किसी खास उपकरण जैसे टेलिस्‍कोप, बाइनाकुलर की जरूरत नहीं होती है, केवल आकाश साफ और बादल रहित होना चाहिए। इसे खुली आंखों से भी देखा जा सकता है। सारिका ने बताया कि अधिकांश सोशल मीडिया में इस बौझार को देखने का समय 13 -14 दिसंबर की रात बताया है, जो कि भारत का समय न होकर पश्चिमी देशों के लिये है। शनिवार 13 दिसंबर को यह गुड श्रेणी में दिखाई देगी, लेकिन एक्‍सीलेंट श्रेणी में यह खगोलीय घटना 14 दिसंबर की रात को ही दिखेगी।

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