पटना (वार्ता)। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने मंगलवार को कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही उनकी पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा, लेकिन जब तक प्रदेश को बदलने का संकल्प पूरा नही कर लेंगे, पीछे हटने का कोई सवाल नही है।
श्री किशोर ने आज बिहार चुनाव के बाद पहली बार संवाददाता समेलन में मुखातिब होते हुए कहा कि प्रदेश में व्यवस्था बदलने का उन्होंने एक ईमानदार प्रयास किया, लेकिन किसी कारणवश सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि जनता को जरुरी मुद्दे समझाने में शायद कुछ कमी रह गयी, जिसकी वजह से समर्थन वोटों में तब्दील नहीं हो सका और अब पार्टी आत्ममंथन के बाद आगे की रणनीति तय करेगी।
श्री किशोर ने यूनीवार्ता के सवाल क्या भविष्य में एक मजबूत विपक्ष बनने के लिए जनसुराज कुछ अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में शामिल होगा, के जवाब में कहा कि अभी तो पार्टी के पास विधानसभा में कोई जगह नहीं है। फिलहाल उनकी पार्टी आत्ममंथन के दौर से गुजरेगी और उसके बाद निष्कर्ष के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
जनसुराज के सूत्रधार ने कहा कि भले ही उनकी पार्टी चुनाव में कोई सीट नहीं जीत सकी, लेकिन इसकी दिशा बदलने में उसके योगदान को खारिज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पक्ष हो या विपक्ष पहली बार जाति और धर्म से दीगर शिक्षा, रोजगार और पलायन की बात करते नजर आए। उन्होंने कहा कि ये सभी मुद्दे बिहार की राजनीति में पहली बार जनसुराज ने ही उठाये थे।
श्री किशोर ने कहा कि जनसुराज ने बिहार में व्यवस्था बदलने की एक ईमानदार कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने जाति, धर्म में समाज को बांट के जनता से वोट नहीं मांगा और ना ही किसी भ्रष्ट तरीके का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में हुई हार की जिमेदारी वह लेते हैं और आत्ममंथन के क्रम में दो दिन बाद पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम जा कर चौबीस घन्टे का उपवास रखेंगे।
जनसुराज के सूत्रधार ने महाभारत की लड़ाई में अभिमन्यु की कहानी सुनाई, जिसे चक्रव्यूह में डाल कर कौरव सेना के योद्धाओं ने मार दिया था। उन्होंने कहा कि मारे जाने के बावजूद दुनिया अभिमन्यु की वीरता की कहानी ही कहता है। उन्होंने कहा कि भले अभिमन्यु मारा गया, लेकिन अन्तत: जीत उसी सेना की हुई, जिसके लिए वह लड़ रहा था। उन्होंने कहा कि थोड़े समय के लिए झूठ भले जीत जाए, लेकिन अन्तत: जीत सत्य की ही होती है।
श्री किशोर ने कहा कि कोई भी व्यक्ति तब तक जंग नही हारता, जब तक वह मैदान नहीं छोड़ दे। उन्होंने कहा कि बिहार को बेहतर बनाने के संकल्प से करीब साढ़े तीन साल से वह लगे हुए हैं और आगे भी उनके प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा को बिहार में सकारात्मक बदलाव आने से पहले पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।



