प्रेम शर्मा
केंद्रीय बजट 2026-27 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।हॉलाकि हमेशा ही देश बजट 25 प्रतिशत और 75 प्रतिशत की हैसियत के रूप में देखा गया है। आम आदमी की जरूरत रोटी कपड़ा और मकान की प्राथमिकता किसी बजट में नही रही । जबकि सबसे ज्यादा बजट में दरकार इसी की होनी चाहिए। आज भी देश के 75 प्रतिशत आबादी की आय और महंगाई में जमीन आसमान का अन्तर है। लेकिन हर सरकार ने नौकरी पेशा, व्यापारी, धन्नासेठों और नेताओं के हिसाब वाले बजट को प्राथमिकता दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश करने वाली हैं। मोदी 3.0 सरकार के इस तीसरे पूर्ण बजट से देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स, विशेषकर मध्यम वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों और निवेशकों को बड़ी उम्मीदें हैं। वैसे भी बजट का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में एक ही सवाल आता है इनकम टैक्स में क्या बदलेगा। खासकर मध्यमवर्गीय और नौकरीपेेशा करदाता को इस बार इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद है। महंगाई, बढ़ती ईएमआई और रोजमर्रा के खर्चों के बीच कर संरचना में बदलाव की मांग हमेशा ही रही है। हर साल की तरह इस बार भी आम लोगों की नजर बजट पर टिकी है। नौकरी पेशा, मीडिल क्लास परिवार हों वरिष्ठ नागरिक या फिर निवेश करने वाले लोग सबको टैक्स में थोड़ी राहत की उम्मीद है। सबसे खास बॉत यह कि बढ़ती महंगाई के बीच सीमित आय वाली देश की सर्वाधिक आबादी को महंगाई से राहत दिलाने वाले बजट की आस बनी हुई है।वैसे भी साल 2025 और 2026 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद, इस बार उम्मीदों का बाजार और भी गर्म है। पिछले बजट में नए टैक्स रिजीम में 12 लाख तक की इनकम को टैक्स-फ्री कर दिया गया था, अब लोग और ज्यादा राहत की उम्मीद कर रहे हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पुरानी टैक्स व्यवस्था में बदलाव को लेकर है। वैसे भी 2014 के बाद से धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये की निवेश सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसे इस बार बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की मांग लम्बे समय से की जा रही है। होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने और मानक कटौती में बढ़ोतरी करने की मांग की जा रही है। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव की उम्मीद है, खासकर इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर, ताकि निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिले। सरचार्ज कम हो और पीक टैक्स रेट 30 फीसदी के आसपास कैप हो जाए। शादीशुदा जोड़े की पति और पत्नी की आय को जोड़कर टैक्स की गणना की पुरानी डिमांड फिर से उठ रही है, जिससे सिंगल-इनकम फैमिली को फायदा हो सकता है। विवाहित जोड़ों की आय पर मिलकर टैक्स लगाने से परिवार के कुल टैक्स बोझ में कमी आ सके। जब दुनिया में ट्रेड टेंशन और अमेरिकी टैरिफ का दबाव है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार ऐसे कदम उठाएगी जिससे इनका असर भारत पर कम पड़े। आम आदमी को नई इनकम टैक्स रिजीम में राहत, घर खरीदने वालों को रियल एस्टेट में सस्ती लोन और टैक्स बेनेफिट, और निवेशकों को गोल्ड-सिल्वर पर ड्यूटी या टैक्स राहत की आस है, ताकि जेब पर बोझ थोड़ा हल्का हो सके। तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद वैश्विक अस्थिरता और वित्तीय जोखिमों के बीच आने वाला यह बजट सरकार के आर्थिक एजेंडे की दिशा तय करेगा। कंपनियां टैक्स राहत, निवेश प्रोत्साहन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने की उम्मीद कर रही हैं, वहीं आम लोग आयकर राहत, महंगाई नियंत्रण और सामाजिक कल्याण योजनाओं की घोषणाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उम्मीद लगाई जा रही है कि सरकार घरेलू बजट उपभोक्ता पर ज्यादा से ज्यादा फोकस कर सकती है।
वैसे अनुमान यह है कि सीतारमण राजकोषीय घाटा समेत 3 अहम मुद्दों का लेखा-जोखा व नजरिया पेश करेंगी। इनमें पहला सरकार का अगले वर्ष अर्थव्यवस्था की अनुमानित विकास दर और विभिन्न योजनाओं एवं विभागों पर होने वाला खर्च, दूसरा, सरकार विभिन्न स्रोतों से कितना राजस्व जुटाएगी, और तीसरा, घोषित व्यय और अपेक्षित राजस्व के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए सरकार को जो ऋण लेना पड़ता है, जिसे राजकोषीय घाटा कहा जाता है। यूनियन बजट 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा बनाई गई यूएस टैरिफ पॉलिसी के असर को कम करने की काफी संभावना है। यानी सरकार ऐसे उपायों का एलान कर सकती है, जिनसे यूएस टैरिफ का प्रभाव कम हो सकता है, जिससे भारत के घरेलू ग्रोथ इंजन पर दबाव घटेगा। जानकारों का अनुमान है कि ग्लोबल ट्रेड पर दबाव बरकरार रहे। ऐसे में एक्सपोर्ट इंसेंटिव, कस्टम ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने आदि के जरिए बेहतर प्रदर्शन से मार्जिन को अतिरिक्त सहारा मिलेगा और मैन्युफैक्चरर्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आदि को मजबूत सपोर्ट के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च पर अच्छे प्रदर्शन के साथ कमाई की विजिबिलिटी बनी रहेगी, जिससे घरेलू मांग के जरिए दबाव कम होगा। अंदाजा लगाया जा रहा है कि सरकार मार्केट पॉलिसी में निरंतरता और राजकोषीय अनुशासन पर नजर रखेंगी। जानकारों का मानना है कि अगर बजट में इन मामलों पर फोकस किया जाता है, तो भारत ग्लोबल टैरिफ में उतार-चढ़ाव से निपट सकता है और लॉन्ग-टर्म रुकावट का असर अधिक नहीं होगा। वैसे भी भारत सरकार ट्रंप के टैरिफ से बचने के लिए कई स्तरीय सुधारों की कवायद कर रही है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत अब तेज हुई है। कुछ रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि रूस के साथ भारत ने अपना तेल आयात कम किया है। ऐसे में बजट 2026 में टैरिफ सिस्टम को और सहज किया जा सकता है, निर्यातकों की मदद के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव पर जोर दिया जा सकता है, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सुधारने की कवायद की जा सकती है। आजादी के बाद पहली बार कोई बजट रविवार को पेश हो रहा है, जो काफी ऐतिहासिक घटना मानी जा रही है। पहले भी कभी-कभी शनिवार को बजट आया था, जैसे 2015 और 2016 में अरुण जेटली ने पेश किया था, लेकिन रविवार का यह पहला मौका है।इस बार बजट से आम जनता से लेकर इंडस्ट्री के अलग-अलग एक्सपर्ट्स को कई सारी उम्मीदें हैं। किसानों को पीएम किसान, फसल बीमा और सिंचाई योजनाओं में ज्यादा पैसा मिलने की आस है। उद्योग जगत को ग्रोथ के लिए पॉलिसी सपोर्ट, टैक्स में आसानी और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाले ऐलान की उम्मीद है। यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और आम आदमी की जिंदगी आसान करने वाला हो सकता है। इसका लोग उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।
सीतारमण के नौवें बजट से उम्मीदें


