सुकना: दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (DHR) की गौरवशाली विरासत और इतिहास को आम लोगों के बीच आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से सुकना रेलवे स्टेशन पर ‘स्टेशन महोत्सव’ की शुरुआत हुई। उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे (NFR) के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने फीता काटकर महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर सुकना स्टेशन परिसर में एक नई फोटो गैलरी का भी उद्घाटन किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी
महोत्सव के दौरान सुकना स्टेशन पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। गीत और नृत्य के साथ विद्यार्थियों के लिए भी कई कार्यक्रम आयोजित हुए। इससे पहले आयोजित निबंध लेखन और चित्रांकन प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा चयनित विद्यार्थियों को NFR महाप्रबंधक की मौजूदगी में पुरस्कृत किया गया।
सुकना स्टेशन के प्रबंधक स्वपन मलाकार ने बताया कि DHR की विरासत और संस्कृति से स्थानीय विद्यार्थियों तथा आम लोगों को अधिक से अधिक जोड़ना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महाप्रबंधक कार्शियांग और दार्जिलिंग के लिए रवाना हुए।
146 वर्षों के इतिहास की दुर्लभ तस्वीरें
DHR के 146 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने के लिए विशेष फोटो प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें ऐतिहासिक टॉय ट्रेन की यात्रा, उसके विकास और विभिन्न महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। प्रदर्शनी में एक जापानी फोटोग्राफर द्वारा खींची गई कई दुर्लभ पुरानी तस्वीरों के साथ रेलवे के संग्रह की ऐतिहासिक तस्वीरें भी शामिल हैं।
प्रत्येक तस्वीर के साथ QR कोड लगाया गया है। इसे मोबाइल फोन से स्कैन कर दर्शक संबंधित तस्वीर के इतिहास और विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
विरासत संरक्षण पर जोर
DHR के हेरिटेज स्टेशनों, स्टीम इंजन और पारंपरिक बुनियादी ढांचे के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घुम स्टेशन म्यूजियम सहित विभिन्न हेरिटेज केंद्रों की टिकट व्यवस्था को आसान बनाने की पहल की गई है। भविष्य में पर्यटकों की सुविधा के लिए यात्रा टिकट के साथ संग्रहालय प्रवेश की सुविधा जोड़ने की योजना भी है।
DHR के पारंपरिक स्टीम इंजन और पुराने कोचों के मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए उनका रखरखाव किया जा रहा है। पर्यटकों की बढ़ती मांग को देखते हुए पिछले वर्ष बेड़े में तीन नए डीजल इंजन भी शामिल किए गए।
विरासत और आधुनिक तकनीक का संगम
सौ वर्ष से अधिक पुराने तिनधरिया वर्कशॉप के मूल ढांचे को संरक्षित करने के साथ DHR की विभिन्न सुविधाओं के रखरखाव पर भी जोर दिया जा रहा है। 146 वर्षों की विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़कर इतिहास, संस्कृति और धरोहर को नई पीढ़ी तक सरल एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।



