Thursday, February 12, 2026
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ऑनलाइन जुआ घर का अंत

प्रेम शर्मा
निश्चित तौर पर 28 प्रतिशत जीएसटी राजस्व को दरकिनार करते हुए मोदी सरकार ने आनलाइन जुआ घरों की बंदी पर मुहर लगा दी है। पैसों की लालच में अब तक आनलाइन जुए के चक्कर में हजारों लोगों ने आत्महत्या कर ली तो लाखों लोग कर्जदार और बर्बाद हो गए। वैसे तो ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा संगठित जुआ बना हुआ है। इसलिए इसे प्रतिबंधित करने के लिए लाए गए विधेयक को देर से, लेकिन सही दिशा में उठाया गया कदम माना जाएगा। यह भी स्वागतयोग्य है कि इसके दायरे में उन ऑनलाइन गेक्वस को नहीं रखा गया है, जिसमें पैसे का लेन-देन नहीं होता।
बहरहाल, इस इंडस्ट्री से बहुत बड़े स्वार्थ जुड़े हुए हैं। इसलिए बिल पारित होने के बाद भी प्रस्तावित कानून के प्रभावी ढंग से लागू हो पाने को लेकर आशंकाएं हैं। बताया जा रहा है कि गेमिंग इंडस्ट्री इसे न्यायपालिका में चुनौती देने की तैयारी में है। प्रोमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 के खिलाफ सरकार और अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए बड़े पैमाने पर लॉबिंग शुरू कर दी है। ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन व विनियमन विधेयक, 2025 राष्टï्रपति की मंजूरी के बाद अब कानून का रूप ले चुका है। इस कानून के लागू होते ही भारत के ऑनलाइन गेमिंग परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ गया है। शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद से पारित इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी।
ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े नए कानून लागू होने के बाद सभी ऑनलाइन मनी गेम्स, चाहे वे स्किल पर आधारित हों या किस्मत पर तथा इसमें ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स और लॉटरी भी शामिल होंगे। ऐसे खेलों से जुड़े विज्ञापन, प्रमोशन और बैंक या पेमेंट ऐप्स के जरिए होने वाले लेन-देन पर भी प्रतिबंध है। मनी गेम्स ऑफर करने पर अधिकतम 3 साल की जेल और एक करोड़ रुपये तक जुर्माना होगा। विज्ञापन करने पर 2 साल की जेल और 50 लाख रुपये जुर्माना होगा। दोहराने पर 3 से 5 साल की जेल और दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना होगा। केंद्र सरकार या नए प्राधिकरण के निर्देशों का पालन न करने पर 10 लाख का जुर्माना, पंजीकरण निलंबन या रद्दीकरण, और संचालन पर प्रतिबंध लग सकता है। मेजबानी और वित्तीय सुविधा से संबंधित अपराधों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत स्पष्ट रूप से संज्ञेय और गैर-जमानती घोषित किया गया है।
ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन व विनियमन विधेयक, 2025 के तहत अब केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी नामक नया राष्ट्रीय निकाय बनाएगी। यह ऑनलाइन गेम्स को श्रेणीबद्ध और पंजीकृत करेगा। यह तय करेगा कि कौन सा गेम प्रतिबंधित मनी गेम है। शिकायतों का निपटारा और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। विधेयक के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक नया प्राधिकरण स्थापित किया जाएगा। इसकी प्रारंभिक लागत लगभग 50 करोड़ रुपये और वार्षिक लागत 20 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसका वित्तपोषण भारत की संचित निधि से किया जाएगा। ई-स्पोर्ट्स को मान्यता प्राप्त नियमों और मानकों के साथ आभासी मैदानों में खेले जाने वाले प्रतिस्पर्धी कौशल-आधारित खेलों के रूप में परिभाषित किया गया है।
सरकार ने पहले ही 2022 में ई-स्पोर्ट्स को एक बहु-खेल आयोजन के रूप में मान्यता दे दी थी। हालाकि इस विधेयक के आने के साथ ही भारतीय गेमिंग महासंघ (एआईजीएफ), ई-गेमिंग महासंघ (ईजीएफ) और भारतीय फैंटेसी खेल महासंघ (एफआईएफएस) ने इस विधेयक को लेकर चिंता जाहिर की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस तरह का पूर्ण प्रतिबंध उद्योग को बर्बाद कर देगा। इससे लोगों की नौकरियां तो जाएंगी ही, इसके अलावा करोड़ों उपोयगकर्ता अवैध विदेशी सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफार्मों की ओर धकेले जाएंगे। इसका उद्यम मूल्यांकन दो लाख करोड़ रुपये से अधिक है और वार्षिक राजस्व 31,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में सालाना 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देता है।
एक चौकाने वाला आकड़ा यह कि भारतीय ऑनलाइन गेम्स की कुल संक्चया 2020 में 36 करोड़ से बढक़र 2024 में 50 करोड़ से अधिक हो गई है। उद्योग ने जून 2022 तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है। उद्योग निकायों ने जोर देकर कहा कि प्रतिबंध से वैश्विक निवेश और निवेशक भावना पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप 400 से अधिक कंपनियां बंद हो सकती हैं और दो लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
इस अध्यादेश के मंजूर होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन कि इस बात को नकारा नही जा सकता कि अब भारत दुनिया की ऑलाइन गेमिंग का हब बन सकता है। सरकार शुरुआत से ही वैध ई-स्पोर्ट्स और गेम डेवलपर्स को बढ़ावा दे रही है। शतरंज समेत अन्य वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त ई-स्पोर्ट्स अब युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के दायरे में आते हैं। इसके साथ ही सरकार एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स सेक्टर को भी प्रोत्साहित कर रही है। इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है। वहीं, सॉक्रटवेयर टेक्नोलॉजी पाञ्चर्स ऑफ इंडिया के तहत विभिन्न सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी खोले गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम से एक ओर देश में ई-स्पोर्ट्स और क्रिएटिव गेमिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर अवैध और जोखिमपूर्ण ऑनलाइन मनी-गेमिंग गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। दूसरी तरफ प्रस्तावित कानून को लागू करना नरेंद्र मोदी सरकार की संकल्प-शक्ति का एक बड़ा इक्वतहान होगा। खुद सरकार ने बताया है कि देश के युवाओं में ऑनलाइन गेमिंग की लत बढ़ती चली गई है। इस कारण हर साल 45 करोड़ लोग पैसा गंवाते हैं। अब जब सरकार ने राजस्व पर सामाजिक हित को तरजीह देने का रुख लिया है, जिस पर उसे कायम रहना होगा। बेशक, स्वस्थ स्थिति यह होगी कि उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जाए, लेकिन उसे पूर्व शर्त बना कर जुआ जैसे कारोबार से करोड़ों की बदहाली बढ़ाते रहना किसी स्वस्थ समाज को कतई मंजूर नहीं हो सकता। क्योंकि यह ऐसी मृगमरीचिका है जिसे देखने के बाद हर आम और खास इंसान बेशुध हो जाता है। यही नही अच्छे खासे जानकार और बुद्धिजीवी इस दलदल का शिकार हो कर बर्बाद हो गए और बर्बाद हो रहे है। कुल मिलाकर सरकार को इस अध्यादेश को लागू करने में अडिग रहना होगा।

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